31 दिसंबर 2018

जब काकभुशुण्डि ने गरुड़ का भ्रम दूर किया

रामायण में एक प्रसंग ऐसा आता है जब नारायण के वाहन गरुड़ को श्रीराम के विष्णु अवतार होने पर संदेह हो गया था। ये वर्णन तब आता है जब श्रीराम की सेना ने लंका पर आक्रमण किया और श्रीराम के नेतृत्व में वानरों और ऋक्षों की सेना ने रावण के कई महारथियों का वध कर दिया। यहाँ तक कि कुम्भकर्ण भी श्रीराम के हाथों वीरगति को प्राप्त हुआ। तब रावण ने स्वयं युद्ध में जाने की ठानी पर उसके पुत्र मेघनाद ने अपने पिता को रोकते हुए कहा कि जब तक वो है तब तक उन्हें राजा होते हुए युद्ध में नहीं जाना चाहिए।

29 दिसंबर 2018

भगवान दत्तात्रेय के २४ गुरु

भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्रि के पुत्र थे जो नारायण के अंश से जन्मे थे। उन्हें भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है। श्री दत्तात्रेय ने एक बार देवर्षि नारद से कहा था कि उन्होंने कई लोगों और चीजों से काफी कुछ सीखा है और उन्होंने जिनसे भी सीखा है उन्हें वे अपना गुरु मानते है। यहाँ तक कि उन्होंने पशुओं के भी अपने गुरु का दर्जा दिया। देवर्षि नारद के अनुसार भगवान दत्तात्रेय ने उन्हें अपने २४ गुरुओं के बारे में बताया। ये हैं:

27 दिसंबर 2018

मानवता को महर्षि मनु की देन

'मनुस्मृति नामक धर्मशास्त्र और संविधान के प्रणेता राजर्षि मनु 'स्वायम्भुव' न केवल भारत की, अपितु सम्पूर्ण मानवता की धरोहर हैं। आदिकालीन समाज में मानवता की स्थापना, संस्कृति-सभ्यता का निर्माण और इनके विकास में राजर्षि मनु का उल्लेखनीय योगदान रहा है। यही कारण है कि भारत के विशाल वाङ्मय के साथ-साथ विश्व के अनेक देशों के साहित्य में मनु और मनुवंश का कृतज्ञतापूर्ण स्मरण तथा उनसे सम्बद्ध घटनाओं का उल्लेख प्राप्त होता है। यह उल्लेख इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि प्राचीन समाज में मनु और मनुवंश का स्थान महत्वपूर्ण और आदरणीय था। जिस प्रकार विभिन्न कालखण्डों में उत्पन्न विशिष्ट व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने तथा उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिये उनका नाम स्थानों, नगरों आदि के साथ जोड़ दिया जाता है उसी प्रकार प्राचीन समाज ने मनु और मनुवंश का नाम सृष्टि के कालखण्डों के साथ जोड़कर चौदह मन्वन्तरों का नाम चौदह मनुओं के नाम पर रखा जिनमें प्रथम मन्वन्तर का नाम 'स्वायम्भुव मन्वन्तर' है। आदि मानव-समाज के मूल रूप से जुड़ाव का जैसा अनोखा उदाहरण मनु स्वायम्भुव का मिलता है वैसा उदाहरण समाज में विरल ही मिलता है।

25 दिसंबर 2018

भगवान शिव के छः पुत्र

वैसे तो जब शिवपुत्र की बात आती है तो हमारे ध्यान में कार्तिकेय और गणेश ही आते हैं। वैसे तो भगवान शिव के किसी भी पुत्र ने माता पार्वती के गर्भ से जन्म नहीं लिया है किन्तु फिर भी कार्तिकेय और गणेश को शिव-पार्वती का ही पुत्र माना जाता है और इनकी प्रसिद्धि सबसे अधिक है। किन्तु इसके अतिरिक्त भी चार व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हे शिवपुत्र होने का गौरव प्राप्त है। हालाँकि ये इतने प्रसिद्ध नहीं हैं और पुराणों में भी इनके शिवपुत्र होने के विषय में अधिक वर्णन नहीं किया गया है किन्तु इन्हे भगवान शिव और माता पार्वती का पुत्र ही माना जाता है। तो आइये उनके बारे में कुछ जानते हैं:

23 दिसंबर 2018

राक्षसों का वंश वर्णन

पुराणों के अनुसार परमपिता ब्रह्मा के शरीर से जल की उत्पत्ति हुई। उसी जल से दो जातियों की उत्पत्ति हुई जिन्होंने ब्रह्मदेव से पूछा कि उनकी उत्पत्ति क्यों हुई है? तब ब्रह्मा ने उनसे पूछा कि तुममे से कौन इस जल की रक्षा करेगा। उनमे से एक ने कहा कि हम इस जल की रक्षा करेंगे, वे "राक्षस" कहलाये। दूसरे ने कहा वे उस जल का यक्षण (पूजा) करेंगे, वे यक्ष कहलाये। तब ब्रह्मदेव ने दो राक्षसों हेति-प्रहेति की उत्त्पति कि जिससे आगे चल कर राक्षस वंश चला। आगे चल कर इस वंश में एक से एक पराक्रमी योद्धाओं ने जन्म लिया जिसमे से सबसे प्रसिद्ध रावण है। इसके अतिरिक्त ब्रह्मा के पौत्र और महर्षि मरीचि के पुत्र महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी सुरसा के पुत्रों को भी राक्षस कहा जाता है। आइये राक्षस वंश पर एक दृष्टि डालते हैं:

21 दिसंबर 2018

श्री दत्तात्रेयस्तोत्रम्

जटाधरं पाण्डुरंगं शूलहस्तं दयानिधिम्।
सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ॥१॥

जगदुत्पत्तिकर्त्रे च स्थितिसंहारहेतवे।
भवपाशविमुक्ताय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥२॥

जराजन्मविनाशाय देहशुद्धिकराय च।
दिगंबर दयामूर्ते दत्तात्रेय नमोस्तुते॥३॥

कर्पूरकान्तिदेहाय ब्रह्ममूर्तिधराय च।
वेदशास्स्त्रपरिज्ञाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥४॥

ह्रस्वदीर्घकृशस्थूलनामगोत्रविवर्जित!
पञ्चभूतैकदीप्ताय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥५॥

यज्ञभोक्त्रे च यज्ञेय यज्ञरूपधराय च।
यज्ञप्रियाय सिद्धाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥६॥

19 दिसंबर 2018

काकभुशुण्डि

काकभुशुण्डि का वर्णन वाल्मीकि रामायण एवं तुलसीदास के रामचरितमानस में आता है। सबसे पहला वर्णन इनका तब आता है जब देवी पार्वती ने महादेव से श्रीराम की कथा सुनाने का अनुरोध किया था। माता के अनुरोध पर भगवान शिव उन्हें एकांत में ले गए और रामकथा विस्तार से सुनाने लगे। दैववश देवताओं के लिए भी दुर्लभ उस कथा को वहाँ बैठे एक कौवे ने सुन लिया। भगवान शिव द्वारा कथा सुनाये जाने पर उसे श्रीराम के सभी रहस्यों सहित पूर्ण कथा का ज्ञान हो गया। वही कौवा आगे चल कर काकभुशुण्डि के रूप में जन्मा।

16 दिसंबर 2018

हिन्दू धर्म में संख्याओं का महत्व

१ 
  • एक ओम्कार् -
२ 
  • दो लिंग - नर और नारी ।
  • दो पक्ष - शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
  • दो पूजा - वैदिकी और तांत्रिकी।
  • दो अयन- उत्तरायन और दक्षिणायन।

14 दिसंबर 2018

श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र

पिछले लेख में हमने पञ्चाक्षरी मन्त्र के बारे में चर्चा की थी। आदि शंकराचार्य ने इस महान पञ्चाक्षरी मन्त्र की महत्ता को विस्तृत तरह से काव्य के रूप में बताया है जो "श्री शिव पञ्चाक्षर स्त्रोत्र" के रूप में जाना जाता है। शिव पंचाक्षर स्तोत्र पंचाक्षरी मन्त्र ॐ नमः शिवाय की ही विस्तृत व्याख्या है। पञ्चाक्षरी मन्त्र की तरह ही इसके पाँच छंद हैं और अंतिम छंद के रूप में इसके महत्त्व को बताया गया है। आदि शंकराचार्य के विषय में कहा जाता है कि - अष्टवर्षेचतुर्वेदी द्वादशेसर्वशास्त्रवित् षोडशेकृतवान्भाष्यम्द्वात्रिंशेमुनिरभ्यगात्। अर्थात: आठ वर्ष की आयु में चारों वेदों में निष्णात हो गए, बारह वर्ष की आयु में सभी शास्त्रों में पारंगत, सोलह वर्ष की आयु में शांकरभाष्य तथा बत्तीस वर्ष की आयु में शरीर त्याग दिया। तो आइये इस स्तोत्र की महिमा समझते हैं। 

12 दिसंबर 2018

"ॐ नमः शिवाय" - पञ्चाक्षरी मन्त्र का महत्त्व

वेदों और पुराणों में वर्णित जो सर्वाधिक प्रभावशाली एवं महत्वपूर्ण मन्त्र हैं, उनमे से श्रेष्ठ है भगवान शिव का पञ्चाक्षरी मन्त्र - "ॐ नमः शिवाय"। इसे कई सभ्यताओं में महामंत्र भी माना गया है। ये पंचाक्षरी मन्त्र, जिसमे पाँच अक्षरों का मेल है, संसार के पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है जिसके बिना जीवन का अस्तित्व ही संभव नहीं है। ॐ नमः शिवाय का मूल अर्थ है "भगवान शिव को नमस्कार", तो अगर एक प्रकार से देखें तो इस मन्त्र का अर्थ बहुत ही सरल है, ठीक उसी तरह जिस प्रकार भोलेनाथ को समझना बहुत सरल है। साथ ही साथ ये मन्त्र उतना ही महत्वपूर्ण और शक्तिशाली है जितने महादेव। इसे पञ्चाक्षरी मन्त्र इसी लिए कहते हैं क्यूंकि श्री रुद्रम चमकम (कृष्ण यजुर्वेद) एवं रुद्राष्टाध्यी (शुक्ल यजुर्वेद) के अनुसार ये पाँच अक्षरों से मिलकर बना है:

10 दिसंबर 2018

रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य

वाल्मीकि रामायण के बाद अगर कोई और राम कथा सबसे प्रसिद्ध है तो वो है तुलसीदास कृत रामचरितमानस। इसे तुलसीदास जी ने १५७४ ईस्वी में लिखना आरम्भ किया था और २ वर्ष ७ मास और २६ दिन के बाद १५७६ ईस्वी को इसे पूर्ण किया। आइये रामचरितमानस के बारे में कुछ अनसुने तथ्य जानते हैं।
  1. मानस में "राम" शब्द कितनी बार आया है: १४४३ बार 
  2. मानस में "सीता" शब्द कितनी बार आया है: १४७ बार 

8 दिसंबर 2018

हनुमद रामायण - जिसे बजरंगबली ने स्वयं समुद्र में डुबा दिया

रामायण का जिक्र आते ही हमारे दिमाग में सबसे पहले महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया मूल रामायण ही आता है। आधुनिक युग में उनके बाद सबसे प्रसिद्ध रचना तुलसीदास कृत रामचरितमानस है। इसके अतिरिक्त भी रामायण के कई और महत्वपूर्ण स्वरुप हैं जैसे कम्ब रामायण इत्यादि। ये बात तो निर्विवाद है कि रामायण में अगर कोई श्रीराम के अनन्य भक्त थे तो वो महाबली हनुमान ही थे। बहुत कम लोगों को ये पता होगा कि रामायण का एक स्वरुप स्वयं पवनपुत्र हनुमान ने भी लिखा था किन्तु वो अब उपलब्ध नहीं है क्यूंकि ऐसी मान्यता है कि उस रामायण को स्वयं पवनपुत्र ने समुद्र में डुबा दिया था। इस घटना का वर्णन भी आपको बहुत ही कम पुस्तकों में मिलता है और ये कथा पीढ़ी दर पीढ़ी लोक कथाओं के रूप में सुनी सुनाई जाती रही है। 

6 दिसंबर 2018

लोमश ऋषि - भगवान शिव का वरदान जिनके लिए श्राप बन गया

लोमश ऋषि परम तपस्वी तथा विद्वान थे। वे बड़े-बड़े रोमों या रोओं वाले थे इसीकारण इनका नाम लोमश पड़ा। सप्त चिरंजीवियों के बारे में तो हम सबने सुना है लेकिन उसके अतिरिक्त भी कुछ ऐसे लोग है जिनके बारे में मान्यता है कि वे अमर हैं। उनमे से एक लोमश ऋषि भी हैं। अमरता का अर्थ यहाँ चिरंजीवी होना नहीं है बल्कि उनकी अत्यधिक लम्बी आयु से है। लोमश ऋषि ने युधिष्ठिर को ज्ञान की गूढ़ बातें बताई थी जिससे वे एक योग्य राजा बने। एक बार लोमश ऋषि भगवत कथा कर रहे थे। उसी भीड़ में बैठा एक व्यक्ति उन्हें बार-बार टोक रहा था। वो कभी एक प्रश्न पूछता तो कभी दूसरा। अंत में इससे क्रोधित होकर लोमश जी ने कहा - "रे मुर्ख! तू क्यों कौवे की तरह काँव-काँव कर रहा है? जा अगले जन्म में तू कौवा ही बन।"

4 दिसंबर 2018

धर्मः मम - ३ (अंतिम भाग)

दिव्यवंशी पाण्डवों में स्वविवेक है, विचारशीलता है, सत्य विद्यमान है और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम है। स्वविवेक से ही धर्ममम का विस्तार होता है, इसकी गूढता सरलता में परिवर्तित होती है, इसके मर्म का ज्ञान होता है। बृहस्पति स्मृति में कहा गया है -

केवलं शास्त्रमाश्रित्य न कर्तव्यो विनिर्णयः !
युक्तिहीनविचारे तु धर्महानिः प्रजायते !!

2 दिसंबर 2018

धर्मः मम - २

कुरुक्षेत्र को धर्मभूमि कहा गया है जहाँ ब्रह्मा जी और देवगणों ने तप किया था। चन्द्रवंशी राजा कुरु ने तपस्या की थी और इन्हीं के नाम पर इस क्षेत्र का नाम कुरुक्षेत्र पडा। यह भूमि पुण्यों में वृद्धि करती है, यह परम पवित्र तीर्थस्थल रहा है, यहाँ युद्धस्थल में वीरगति प्राप्त होने वाले वीरों को स्वर्ग की प्राप्ति हो इसी हेतु इस क्षेत्र को युद्ध के लिए चुना गया। चौरासी लाख योनियों में एकमात्र मानवयोनि ही कर्मयोनि और भोगयोनि दोनों हैं। यह शरीर कुरुक्षेत्र है, कुरु अर्थात् कर्म करने का पावन संदेश। इस कर्मरूपी क्षेत्र में जैसा बीज बोया जाता है वैसी ही फसल कटती है।

30 नवंबर 2018

धर्मः मम - १

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः !
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय !! - श्रीमद्भगवद्गीता !! १ !! १ !!

हे संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित युद्ध की इच्छा वाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः !
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्धुव्रा नीतिर्मतिर्मम !! - श्रीमद्भगवद्गीता !! १८ !! ७८ !!

28 नवंबर 2018

बिल्वपत्र (बेलपत्र)

एक बार देवर्षि नारद कैलाश पहुँचे, वहाँ उन्हें भगवान शंकर और माता पार्वती के दर्शन हुए। दोनों को प्रणाम करने के पश्चात देवर्षि ने महादेव से पूछा कि "हे प्रभु! पृथ्वी पर मनुष्य अत्यंत दुखी है और उनके दुखों का निवारण आपके द्वारा ही संभव है। अतः आप मुझे वो विधि बताइये जिससे मनुष्य आपको शीघ्र और सरलता से प्रसन्न कर सके। इसे जानकार मानव जाति का कल्याण होगा।" नारद का प्रश्न सुनकर महादेव बोले - "देवर्षि! मुझे प्रसन्न करने के लिए किसी पूजा विधि की आवश्यकता नहीं है। मैं तो अपने भक्त भक्तिभाव से ही प्रसन्न हो जाता हूँ। किन्तु आपने पूछा है तो मैं बताता हूँ। मुझे बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय है अतः जो मनुष्य भक्तिभाव से मुझे केवल जल और बिल्वपत्र अर्पण करता है, मैं उससे ही प्रसन्न हो जाता हूँ।" नारद उनकी बात सुनकर बड़े प्रसन्न हुए और उनकी आज्ञा लेकर पृथ्वी की ओर चले। उनके जाने के पश्चात देवी पार्वती ने पूछा कि क्या कारण है कि उन्हें बिल्वपत्र इतना प्रिय है। तब भगवान शिव ने कहा "हे देवी! बिल्वपत्र स्वयं देवी लक्ष्मी का ही रूप है और उन्होंने इसी से मेरी पूजा की थी इसी कारण ये मुझे अत्यंत प्रिय है।" ये सुनकर देवी पार्वती ने वो कथा सुनाने का आग्रह किया कि क्यों देवी लक्ष्मी ने उनकी पूजा की थी।

25 नवंबर 2018

नागवंश और नागपूजा - आधुनिक दृष्टिकोण

नागवंश और नागपूजा का इतिहास भारत में बहुत ही पुराना है। नागों को महर्षि कश्यप और दक्षपुत्री क्रुदु की संतान माना गया है जिनके १००० पुत्र हुए जिनसे १००० नागवंशों की स्थापना हुई। इसके अतिरिक्त विज्ञान भी सर्पों की दुर्लभ प्रजातिओं को ढूँढने में जुटा है। एक जानकारी के मुताबिक उड़ने वाले सांपो की प्रजाति का पता चला है। दक्षिण अमेरिका में इस प्रकार की प्रजाति के सांप केफन अवशेष शोधकर्ताओं को प्राप्त हुए। टेरासोर की नई प्रजाति को "ऑलकारेन" नाम दिया गया। शोधकर्ताओं का प्रमुख उद्देश्य उड़ने वाले साँपों के खास समूह की उत्पति व् विकास के बारे में नई जानकारी के साथ उनके मस्तिक संरचना को समझना आदि रहा है।

23 नवंबर 2018

रक्त्जा और स्वेदजा - अर्जुन और कर्ण के कई जन्मों की प्रतिस्पर्धा

पिछले लेख में हमने महारथी कर्ण के पिछले जन्म "दंबोधव" के बारे में पढ़ा। इससे हमें ये जानने को मिलता है कि इन दोनों के बीच की प्रतिस्पर्धा कितनी पुरानी है। जिन्हे दंबोधव के बारे में पता नहीं था उसके लिए ये कथा सुनना वास्तव में आश्चर्यजनक है। किन्तु उससे भी अधिक आश्चर्यजनक कथा हमें पद्मपुराण में मिलती है जिसमे इन दोनों की प्रतिदंद्विता का विवरण है जो सीधे त्रिदेवों से सम्बंधित है। कथा उस समय की है जब परमपिता ब्रह्मा पंचमुखी थे। उनके चार मुख चारों वेदों का पाठ करते थे किन्तु उर्ध्वमुखी पाँचवा मुख सदैव महादेव की निंदा करता था। इससे रुष्ट होकर महादेव ने ब्रह्मदेव से युद्ध किया और उनका वो पाँचवा मुख काट दिया।

21 नवंबर 2018

दंबोधव - जिसके पाप का दण्ड महारथी कर्ण ने भोगा

महाभारत ऐसी छोटी-छोटी कथाओं का समूह भी है जो हमें आश्चर्यचकित कर देती है। जी सुंदरता के साथ वेदव्यास ने सहस्त्रों छोटी-छोटी घटनाओं को एक साथ पिरोया है वो निश्चय ही अद्वितीय है। ऐसी ही एक कथा दंबोधव दानव की है जो सीधे तौर पर कर्ण से जुडी है और अर्जुन एवं श्रीकृष्ण भी उसका हिस्सा हैं। ये कथा वास्तव में कर्ण के पूर्वजन्म की कथा है जिसके कारण उसे अगले जन्म में भी इतना दुःख भोगना पड़ा।

19 नवंबर 2018

श्राद्ध पक्ष

श्राद्ध शब्द का अर्थ: श्रद्धा पूर्वक पितरों के लिए विधिपूर्वक जो कर्म किया जाता है उस कर्म को श्राद्ध कहते हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार देश काल में पात्र में विधि पूर्वक श्रद्धा से पितरों के उद्देश्य से जो कार्य किया जाए वह श्राद्ध कहलाता है। देश का अर्थ स्थान है काल का अर्थ समय है पात्र का अर्थ वह ब्राह्मण है जिसे हम श्राद्ध की सामग्री दे रहे हैं इन तीनों को भली-भांति समझ लेना चाहिए।

17 नवंबर 2018

जब दुर्योधन ने कृष्ण को वो तीन गलतियाँ बताई जिसके कारण उसकी पराजय हुई

महाभारत सागर की तरह विशाल है। इसके अंदर कथाओं के ऐसे-ऐसे मोती छिपे हैं जिसे ढूँढना कठिन है। कुछ प्रसंग व्यास रचित महाभारत में है तो कुछ शताब्दियों से लोक कथाओं के रूप में सुनी और सुनाई जाती रही है। ऐसा ही एक प्रसंग हम आज आपके लिए ले कर आए हैं। ये घटना तब की है जब भीम ने दुर्योधन की जंघा तोड़ी और वो अपनी अंतिम साँसें ले रहा था। इतनी भीषण शत्रुता होने के बाद भी दुर्योधन की ऐसी मृत्यु देख कर सभी द्रवित हो गए और उसके आस-पास जमा हो गए। दुर्योधन ने अपनी चारो ओर शत्रुओं को देखा किन्तु अब बहुत देर हो चुकी थी। तभी उसने श्रीकृष्ण को अपनी तीन अँगुलियों से इशारा किया। कोई भी उसके इस संकेत को समझ नहीं पाया। तब श्रीकृष्ण ने पांडवों से कहा कि शायद दुर्योधन अपने अंतिम समय में उनसे कुछ कहना चाहता है।

15 नवंबर 2018

गौ माता का वैज्ञानिक महत्व

गौ की महिमा तो अपरम्पार है किन्तु फिर भी कुछ अनजान वैज्ञानिक तथ्य है जो जानने योग्य हैं। कहते है की गौमाता के खुर से उडी हुई धूलि को सिर पर धारण करता है वह मानों तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा पा जाता है। पशुओं में बकरी, भेड़, ऊँटनी, भैंस इत्यादि का दूध भी काफी महत्व रखता है।

13 नवंबर 2018

छठ महापर्व

आप सबों को छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ। पूर्वी भारत, विशेषकर बिहार, झारखण्ड एवं उत्तर प्रदेश में तो इस पर्व का महत्त्व सर्वाधिक है ही, अब भारत के हर क्षेत्र में इस पर्व को मनाया जाता है। भारत के बाहर, विशेषकर नेपाल, इंडोनेशिया, मॉरीशस, फिजी, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिनाद, अमेरिका, इंग्लैण्ड, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, नूज़ीलैण्ड, मलेशिया एवं जापान में भी इसे  वृहद् रूप से मनाया जाता है। ये पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है इसी कारण इसे "छठ" के नाम से जाना जाता है।

11 नवंबर 2018

चामुंडेश्वरी मंदिर - मैसूर

जब आप कर्नाटक के राजसी नगर मैसूर पहुँचते हैं तो मैसूर पैलेस के साथ-साथ जो स्थान आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है वो है १००० मीटर ऊपर चामुंडा पहाड़ी पर स्थित माँ चामुंडेश्वरी का मंदिर। मैसूर शहर से १३ किलोमीटर दूर ये मंदिर समुद्र तल से करीब १०६५ मीटर की उचाई पर है और इतनी उचाई पर मंदिर का निर्माण कर देना ही अपने आप में एक आश्चर्य है। ये मंदिर वास्तुकला का एक अद्वितीय उदाहरण तो है ही, साथ ही साथ इसका पौराणिक महत्त्व भी बहुत अधिक है। मूल रूप से ये मंदिर माँ दुर्गा के एक रूप माँ चामुंडा को समर्पित है और उन्ही पर इसका नामकरण भी है। इसके अतिरिक्त ये ५१ शक्तिपीठों और १८ महाशक्तिपीठों में से भी एक है। यहाँ माँ सती के केश गिरे थे और अन्य शक्तिपीठों की तरह भैरव इसकी सदैव रक्षा करते हैं। आज का वर्तमान मंदिर के मूल भाग का निर्माण १२वीं सदी में होयसल राजवंश के शासकों (कदाचित महाराज विष्णुवर्धन) के द्वारा करवाया गया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण १६वीं शताब्दी में विजयनगर शासकों द्वारा करवाया गया और १९वीं सदी में मैसूर के राजा द्वारा इसकी मरम्मत कराई गयी। ७ मंजिले इस मंदिर की कुल उचाई करीब ४० मीटर है जो द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। 

9 नवंबर 2018

क्यों कायस्थ २४ घंटे के लिए नही करते कलम का उपयोग

आप सभी को चित्रगुप्त पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं। चित्रगुप्त जयन्ती कायस्थ समाज के लिए तो सर्वश्रेष्ठ त्यौहार है ही लेकिन इसके अतिरिक्त अन्य समुदाय के लोग इस बड़ी श्रद्धा से मनाते है। बचपन में हमारे लिए इस दिन का सबसे बड़ा आकर्षण ये होता था कि इस दिन हमें पढाई-लिखाई से छुट्टी मिल जाती थी। ऐसी मान्यता है कि कोई भी कायस्थ चित्रगुप्त पूजा के दिन २४ घंटों के लिए कलम-दवात को हाथ नहीं लगा सकता। उस काल को "परेवा काल" कहते हैं। पूरी दुनिया में कायस्थ दीवाली की पूजा के बाद कलम रख देते हैं और फिर यमद्वितीया के बाद कलम-दवात की पूजा के बाद ही उसे उठाते हैं।

7 नवंबर 2018

कैसे करें दीपावली पूजन

आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ। दीपावली पर श्री गणेश एवं माता लक्ष्मी की पूजा करने से मनुष्य को समस्त मनोवांछित फल की प्राप्ति हो जाती है। पूरे वर्ष घर में लक्ष्मी का वास रहता है और घर मे लक्ष्मी आने से समस्त समस्याओं का निवारण भी हो जाता है। दीपावली की रात्रि में भगवती लक्ष्मी का स्मरण करते हुए अपने गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र का निरंतर जप करने से वह मंत्र सिद्ध हो जाता है। जो दीपावली की रात्रि में जागरण करते हुए लक्ष्मी जी का ध्यान करते हुए जाग कर रात्रि व्यतीत करता है उसके घर में पूरे वर्ष लक्ष्मी का वास रहता है। विशेष रुप से घर की स्त्रियों का सम्मान करने वाले व्यक्ति के घर से लक्ष्मी कभी रुठ कर नहीं जाती इसलिए गृहलक्ष्मी का सम्मान भी अवश्य करना चाहिए। दीपावली की रात्रि में मांस मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

5 नवंबर 2018

धनतेरस

आप सबको धनतेरस की हार्दिक शुभकामनायें। आज का दिन देवताओं के वैद्य माने जाने वाले श्री धन्वन्तरि को समर्पित है। इसी दिन ये समुद्र मंथन से अपने हाथोँ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। कलश के साथ प्रकट होने के कारण ही आज के दिन धातु (सोना, चाँदी) एवं बर्तनों को खरीदने की परंपरा आरम्भ हुई। देव धन्वन्तरि को भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है जो उनके समुद्र मंथन में कच्छप रूप में मंदार पर्वत को अपने ऊपर सँभालने के श्रम के कारण हुआ था। नारायण की भांति ही धन्वन्तरि भी चतुर्भुज हैं और ऊपर के दो हाथों में श्रीहरि की भांति ही शंख और चक्र धारण करते हैं। अन्य दो हाथों में औषधि और अमृत कलश होता है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन जो कुछ भी हम खरीदते हैं वो १३ गुणा बढ़ जाता है। इसी कारण आज के दिन देश भर में लोग कुछ न कुछ खरीदते हैं। २०१६ में भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मानाने का निर्णय लिया। इसके विषय में कई कथा प्रचलित है:

4 नवंबर 2018

अशोक सुंदरी

भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्रों श्री कार्तिकेय एवं श्रीगणेश के विषय में तो हम सभी जानते हैं किन्तु उनकी कन्या "अशोकसुन्दरी" के विषय में सबको अधिक जानकारी नहीं है। हालांकि महादेव की और भी पुत्रियां मानी गयी हैं, विशेषकर जिन्हें नागकन्या माना गया - जया, विषहरी, शामिलबारी, देव और दोतलि। किन्तु अशोक सुंदरी को ही महादेव की की पुत्री बताया गया है इसीलिए वही गणेशजी एवं कार्तिकेय की बहन मानी जाती है। कई जगह पर इन्हे गणेश की छोटी बहन भी बताया गया है लेकिन अधिकतर स्थानों पर ये मान्यता है कि ये गणेश की बड़ी बहन थी। पद्मपुराण अनुसार अशोक सुंदरी देवकन्या हैं। 

2 नवंबर 2018

जब लक्ष्मण की रक्षा हेतु सीता ने उन्हें निगल लिया

रामायण समुद्र की तरह अथाह है। रामायण और रामचरितमानस के अतिरिक्त भी रामायण के कई क्षेत्रीय प्रारूप हैं जो जनमानस में बहुत प्रसिद्ध हैं। आज जो कथा हम आपको बताने जा रहे हैं वो भी कुछ ऐसी ही है। इसका विवरण हमें रामायण अथवा रामचरितमानस में तो नहीं मिलता किन्तु ये कुछ भारतीय लोककथाओं में चाव से सुनी और सुनाई जाती है।

31 अक्तूबर 2018

अहोई अष्टमी

आप सभी को अहोई अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं। ये भारत का एक प्रमुख त्यौहार है जिसे विशेषकर उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस व्रत को पुत्रवती महिलायें अपने पुत्रों की लम्बी आयु के लिए रखती है। वे दिन भर निर्जल उपवास रखती हैं और शाम को तारे के दर्शन के बाद पूजा के साथ अपना उपवास तोड़ती है। होई एक चित्र होता है जिसे दीवार पर बनाया जाता है अथवा किसी कपडे पर काढ़ कर दीवार पर टाँग दिया जाता है। इसमें आठ खानों की एक पुतली बनाई जाती है जिसके इर्द-गिर्द साही और उसके सात बच्चों की आकृति होती है। इस व्रत को करवाचौथ के चार दिन बाद कार्तिक की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और इसी कारण इसे अहोई अष्टमी कहते हैं। अहोई माता की पूजा स्त्रियाँ अपने-अपने सामर्थ्य से करती है। कई संपन्न घरों में अहोई का चित्र चाँदी से भी बनाया जाता है।

30 अक्तूबर 2018

वाल्मीकि रामायण - एक दृष्टिकोण

तुलसी रामायण की जगह वाल्मिकी रामायण क्यों? वाल्मिकी रामायण में राम पर तंज हैं, प्रश्न है। सीता का वनगमन है। लव-कुश के तीखे प्रश्न बाण हैं। तुलसी रामायण जहां उत्तरकांड पर खत्म हो जाती है, वाल्मिकी रामायण में रावण और हनुमान की जन्म कथा, राजा नृग, राजा निमि, राजा ययाति और रामराज्य में कुत्ते के न्याय की उपकथाएं, सीतावनगमन, लवकुश जन्म, अश्वमेघ यज्ञ, लव-कुश का रामायण गान, सीता का भूमि प्रवेश, लक्ष्मण का परित्याग सबकुछ समाहित है। यदि राम को जानना है तो तुलसी बाबा नहीं महाकवि वाल्मिकी को समझना होगा। महाकवि वाल्मिकी ने मर्यादापुरुषोत्तम राम की व्याख्या की है तो सीता के चरित्र के साथ भी पूरा न्याय किया है। लव-कुश के जरिए सीता पर लांछन लगाने वालों का प्रतिकार किया है। वाल्मिकी रामायण पूर्ण है, संपूर्ण है। यह युगपुरुष कृष्ण से पहले का चरित्र है। राम मर्यादा पुरुष थे, कृष्ण युगपुरुष। इसलिए तुलसी बाबा से रामायण को पढ़ना शुरू करें लेकिन समझने के लिए महाकवि वाल्मिकी को अवश्य पढ़े। रामायण से मिली सीख:

28 अक्तूबर 2018

श्रीकृष्ण का पूर्वजन्म

जब कंस ने ये सुना कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान ही उसका वध करेगी तब उसने उसे मारने का निश्चय किया। बाद में इस शर्त पर कि देवकी और वसुदेव अपनी सभी संतानों को जन्म लेते ही उसके हवाले कर देगी, उसने दोनों के प्राण नहीं लिए किन्तु दोनों को कारागार में डाल दिया। एक-एक कर कंस ने दोनों के सात संतानों का वध कर दिया। अब आठवीं संतान के रूप में श्रीहरि विष्णु देवकी के गर्भ से जन्म लेने वाले थे। अपने अन्य पुत्रों के वध से दुखी देवकी और वसुदेव अत्यंत दीन अवस्था में भगवान विष्णु के तप में बैठे। उनके मन में केवल यही प्रश्न था कि आखिर किस पाप का दण्ड उन्हें मिल रहा है? साथ ही ये भी कि क्या उनका आठवाँ पुत्र भी उस दुष्ट कंस के हाथों मारा जाएगा?

26 अक्तूबर 2018

करक चतुर्थी (करवा चौथ) व्रत विधि

कल (शनिवार, २७ अक्टूबर) को करक चतुर्थी का पर्व है जिसे आम भाषा में करवा चौथ कहा जाता है। सनातन धर्म में पति को परमेश्वर की संज्ञा दी गई है। करवा चौथ का व्रत अखंड सुहाग को देने वाला माना जाता है। करवा चौथ का व्रत पति पत्नी के पवित्र प्रेम के रूप में मनाया जाता है जो एक दूसरे के प्रति अपार प्रेम, त्याग एवं उत्सर्ग की चेतना लेकर आता है। इस दिन स्त्रियां सुहागन का रूप धारण कर, पूर्ण श्रृंगार करके, वस्त्र आभूषण धारण करके भगवान चंद्रमा से अपने अखंड सुहाग की प्रार्थना करती है। स्त्रियां ईश्वर के समक्ष दिनभर व्रत रखकर यह प्रण भी करती हैं कि वे मन, वचन और कर्म से पति के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखेंगी।

23 अक्तूबर 2018

कर्म तथा ज्ञान का अंतर एवं परमात्मा दर्शन

हमारे शास्त्रों में दो भागों का वर्णन बतलाया गया है -एक का नाम प्रवृत्ति धर्म और दूसरे को निवृत्ति धर्म कहा गया है। प्रवृत्ति मार्ग को कर्म और निवृत्ति मार्ग को ज्ञान भी कहते है। कर्म (अविधा से मनुष्य बंधन में पड़ता है और ज्ञान से वह बंधनमुक्त हो जाता है। कर्म से मरने के बाद जन्म लेना पड़ता है और सोलह तत्वों से बने हुए शरीर की प्राप्ति होती है किन्तु ज्ञान से नित्य, अव्यक्त एवं अविनाशी परमात्मा प्राप्त होते है। कुछ अल्पज्ञानी मानव कर्म की प्रशंसा करते है, अत: वे भोगासक्त होकर बार -बार देह के बंधन में पड़ते रहते है परन्तु जो मनुष्य धर्म के तत्व को भलीभांति समझते है तथा जिन्हें उत्तम बुध्दि प्राप्त है, वे कर्म की उसी तरह प्रशंसा नहीं करते जैसे नदी का पानी पीने वाला मनुष्य कुएँ का आदर नहीं करता। कर्म के फलस्वरूप प्राप्त होते हैं सुख और दुःख, जन्म और मृत्यु किंतु ज्ञान से उस पद की प्राप्ति होती है जहाँ जाकर मनुष्य सदा के लिए शोक से मुक्त हो जाता है।

21 अक्तूबर 2018

माँ दुर्गा की कथा २: शुम्भ-निशुंभ, धूम्रलोचन एवं चण्ड-मुण्ड वध

पिछले लेख में आपने माँ दुर्गा की उत्पत्ति और महिषासुर के वध की कथा पढ़ी। महिषासुर की मृत्यु के पश्चात दो महापराक्रमी दैत्यों शुम्भ-निशुंभ, जो महर्षि कश्यप और दक्षपुत्री दनु के पुत्र और नमुचि दानव के भाई थे, उन्होंने देवों पर अत्याचार आरम्भ कर दिया। इंद्र ने उनके भाई नमुचि का वध कर दिया जिसके बाद उन्होंने इंद्र को सिंहासनच्युत कर स्वर्ग पर अधिकार जमा लिया। इससे त्रस्त होकर सभी देवता माँ दुर्गा के पास सहायता के लिए पहुँचे। तब उनपर हुए अत्याचार को देख कर देवी उन दोनों के वध को उद्धत हुई। उन्होंने शुम्भ-निशुंभ को युद्ध के लिए ललकारा। जब दोनों भाइयों ने एक स्त्री की ललकार सुनी तो उसका परिहास करते हुए उन्होंने अपने १०००० योद्धाओं को उन्हें बंदी बना कर लाने के लिए भेजा। जब वे सभी देवी के पास पहुँचे तो उनके वाहन सिंह ने अपने तेज दांत और नाखूनों से पूरी सेना का संहार कर दिया। जब शुम्भ-निशुंभ ने ये समाचार सुना तो बड़ा हैरान हुआ। उसने अपने सेनापतिओं चण्ड-मुण्ड को देवी दुर्गा के वध की आज्ञा दे कर भेजा।

19 अक्तूबर 2018

माँ दुर्गा की कथा १: देवी की उत्पत्ति एवं महिषासुर वध

आज नवरात्रि का पर्व समाप्त हो रहा है। आज विजयादशमी के दिन ही देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। आज के दिन ही श्रीराम ने भी रावण का वध किया था। वैसे तो देवी दुर्गा को आदिशक्ति माँ पार्वती का ही एक रूप माना जाता है किन्तु उनका ये रूप इसीलिए विशेष है क्यूँकि देवी दुर्गा की उत्पत्ति मूलतः त्रिदेवों से हुई। इन्हे विजय की देवी माना जाता है जिनकी कृपा से देवताओं ने अत्याचारी असुर से मुक्ति पायी और अपना राज्य पुनः प्राप्त किया।

17 अक्तूबर 2018

जब देवी सती ने भगवान शिव को विवश किया - दस महाविद्याओं की उत्पत्ति

नवरात्रि का त्यौहार चल रहा है जो देवी पार्वती के नौ रूपों को समर्पित है। इनके अतिरिक्त माँ पार्वती का जो मुख्य रूप है वो देवी काली का है जिन्हे महाकाली भी कहते हैं। यद्यपि देवी काली माँ पार्वती का ही एक रूप मानी जाती है किन्तु बहुत कम लोगों को पता है कि देवी काली की उत्पत्ति वास्तव में भगवान शिव की प्रथम पत्नी माँ सती द्वारा हुई थी। इसके विषय में एक बहुत ही रोचक कथा हमें पुराणों में मिलती है। प्रजापति दक्ष परमपिता ब्रम्हा के प्रथम मानस पुत्रों में से एक थे जिनकी पुत्रिओं से ही इस संसार का विस्तार हुआ।

15 अक्तूबर 2018

नवरात्रि पूजा विधि

पूरे वर्ष में चार बार नवरात्रि का आगमन होता है। बुधवार से आरंभ होने वाले नवरात्र को शारदीय नवरात्र के नाम से जाना जाता है । "नवरात्र" जगदंबा की नवरात्रि ९ रात्रियों से संबंधित है। ९ दिन तक माँ भगवती की के अलग रूप की पूजा होती है। भगवती के नाम एवं रूप अलग अलग हैं लेकिन इनका संबंध वास्तव में भगवती माता पार्वती से है। माता पार्वती ही अलग अलग समय में अपने भक्तों के कल्याण के लिए अलग-अलग रूप धारण कर संसार में प्रकट होकर लीला करती है श्री गणेश जी की माता पार्वती की पूजा करने से मनुष्य को समस्त मनोवांछित फल की प्राप्ति हो जाती है किसी भी प्रकार की समस्या हो इन नवरात्रों में मां जगदंबा की आराधना करने से समस्त समस्याओं का निवारण हो जाता है। भगवती के नौ रूप इस प्रकार हैं:

12 अक्तूबर 2018

यमराज

महर्षि कश्यप एवं अदिति पुत्र सूर्यनारायण का विवाह विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से हुआ। उनसे उन्हें वैवस्वत मनु, यम, अश्वनीकुमार, रेवंत नमक पुत्र एवं  यमी (यमुना) नामक पुत्री की प्राप्ति हुई। यमुना ने ही सर्वप्रथम यम को धागा बांध कर रक्षाबंधन का आरम्भ किया था। सूर्यदेव के तेज से भयभीत हो संज्ञा ने अपनी एक प्रतिलिपि छाया के रूप में वहाँ छोड़ अपने पिता विश्वकर्मा के पास आ गयी। छाया से भी सूर्यदेव को सावर्णि मनु एवं शनि नामक पुत्र एवं भद्रा (विष्टि) और ताप्ती नामक पुत्री की प्राप्ति हुई। जब सूर्यदेव को संज्ञा के छल के बारे में पता चला तो उन्होंने उसे श्राप दिया कि उसका पुत्र मृत्यु के सामान भयंकर होगा। उन्ही से यमराज की उत्पत्ति हुई।

10 अक्तूबर 2018

नवरात्रि

आज से भारत में नवरात्रि का आरम्भ हो गया है जो आने वाले दस दिनों तक चलेगा और विजयादशमी (दहशरा) पर समाप्त होगा। ये भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और इसमें देवी पार्वती (दुर्गा) के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इन सभी का पूजन बारी-बारी से किया जाता है और सभी का वाहन सिंह कहा जाता है। नवरात्रि के पहले तीन दिन माँ दुर्गा की पूजा के रूप में मनाया जाता है जहाँ उनके विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन बालिकाओं की, दूसरे दिन युवतियों की और तीसरे दिन परिपक्व महिलाओँ की पूजा करने का विधान है। पर्व के चौथे दिन देवी लक्ष्मी, पाँचवे दिन माँ सरस्वती और छठे दिन शांति देवी की पूजा की जाती है। सातवें दिन पुनः देवी सरस्वती की पूजा होती है और आठवें दिन माँ दुर्गा को बलिदान स्वरुप एक यज्ञ किया जाता है। नौवां दिन अंतिम पूजा का दिन होता है जिसे महानवमी भी कहते हैं। इस दिन नौ देवियों के प्रतीक स्वरुप नौ किशोरी कन्याओं की पूजा की जाती है। उनके चरण धोने के बाद उन्हें मिष्ठान एवं वस्त्र उपहार स्वरुप दिए जाते हैं। ये नौ देवियां हैं:

7 अक्तूबर 2018

जब हनुमान कुम्भकर्ण से शर्त हार गए

लंका में युद्ध अपनी चरम सीमा पर था। श्रीराम की सेना आगे बढ़ती ही जा रही थी और रावण के अनेकानेक महारथी रण में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। अब तक रावण भी समझ गया था कि श्रीराम की सेना से जीतना उतना सरल कार्य नहीं है जितना वो समझ रहा था। तब उसने अपने छोटे भाई कुम्भकर्ण को जगाने का निर्णय लिया जो ब्रह्मदेव के वरदान के कारण ६ महीने तक सोता रहता था। जब कुम्भकर्ण नींद से जागा तो रावण ने उसे स्थिति से अवगत कराया। इसपर कुम्भकर्ण ने रावण को उसके कार्य के लिए खरी-खोटी तो अवश्य सुनाई किन्तु अपने भाई की सहायता से पीछे नहीं हटा।

4 अक्तूबर 2018

नंदी

प्राचीन काल में एक ऋषि थे "शिलाद"। उन्होंने ये निश्चय किया कि वे ब्रह्मचारी ही रहेंगे। जब उनके पित्तरों को ये पता कि शिलाद ने ब्रह्मचारी रहने का निश्चय किया है तो वे दुखी हो गए क्यूँकि जबतक शिलाद को पुत्र प्राप्ति ना हो, उनकी मुक्ति नहीं हो सकती थी। उन्होंने शिलाद मुनि के स्वप्न में ये बात उन्हें बताई। शिलाद विवाह करना नहीं चाहते थे किन्तु अपने पित्तरों के उद्धार के लिए पुत्र प्राप्ति की कामना से उन्होंने देवराज इंद्र की तपस्या की। इंद्र ने उनकी तपस्या से प्रसन्न हो कर कहा कि "हे ऋषि! मैं आपकी तपस्या से अत्यंत प्रसन्न हूँ किन्तु आपके मन में जो इच्छा है उसे मैं पूरा नहीं कर सकता। इसी कारण आप महादेव को प्रसन्न करें।"

1 अक्तूबर 2018

श्रीकृष्ण के अन्य सात भाइयों के नाम

श्रीकृष्ण के जन्म की कहानी हम सभी जानते हैं। जब कंस को ये पता चला कि उसकी चचेरी बहन देवकी का आठवाँ पुत्र उसका वध करेगा तो उसने देवकी को मारने का निश्चय किया। वसुदेव के आग्रह पर वो उन दोनों के प्राण इस शर्त पर छोड़ने को तैयार हुआ कि वे दोनों अपने नवजात शिशु को पैदा होते ही उसके सुपुर्द कर देंगे। दोनों ने उनकी ये शर्त ये सोच कर मान ली कि जब कंस उनके नजात शिशु का मुख देखेगा तो प्रेम के कारण उन्हें मार नहीं पाएगा। किन्तु कंस के ह्रदय में ममता थी ही नहीं। उसने एक-एक कर कंस ने देवकी की छः संतानों को जन्मते ही मृत्यु के घाट उतार दिया। सातवीं संतान को योगमाया ने देवकी की गर्भ से वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया इसी लिए वे संकर्षण कहलाये और बलराम के नाम से विश्व-विख्यात हुए। उनकी आठवीं संतान के रूप में स्वयं श्रीहरि विष्णु ने अवतार लिया। किन्तु क्या आपको कृष्ण एवं बलराम के अतिरिक्त उनके ६ अन्य पुत्रों के नाम ज्ञात हैं? अगर नहीं तो हम आपको देवकी के आठों संतानों के नाम बताते हैं।

29 सितंबर 2018

लक्ष्मी एवं अलक्ष्मी (दरिद्रा) का विवाद

दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी एवं श्रीगणेश के साथ कुबेर जी की भी पूजा की जाती है। उनकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से बताई जाती है जिन्होंने समुद्र से निकलने के पश्चात नारायण को अपना वर चुना। प्राचीन ग्रंथों में लक्ष्मी जी के साथ अलक्ष्मी (दरिद्रा) जी का भी उल्लेख मिलता है। अलक्ष्मी जी को नृति एवं दरिद्रा नाम से भी जाना जाता है। लक्ष्मी जी के प्रभाव का मार्ग धन-संपत्ति, प्रगति का होता है वही अलक्ष्मी जी दरिद्रता, पतन,अंधकार का प्रतीक होती है। एक बार लक्ष्मी और अलक्ष्मी में संवाद हुआ जिसमे दोनों एक दूसरे का विरोध करते हुए स्वयं को श्रेष्ठ बताने लगी।

27 सितंबर 2018

श्रीगणेश के १०८ नाम

  1. बालगणपति
  2. भालचन्द्र
  3. बुद्धिनाथ
  4. धूम्रवर्ण
  5. एकाक्षर
  6. एकदंत
  7. गजकर्ण
  8. गजानन
  9. गजनान
  10. गजवक्र
  11. गजवक्त्र
  12. गणाध्यक्ष
  13. गणपति
  14. गौरीसुत
  15. लंबकर्ण
  16. लंबोदर
  17. महाबल

25 सितंबर 2018

सती देवस्मिता

एक वैश्य जिसका नाम धर्मगुप्त था देवनगरी में रहता था। उसकी कन्या का नाम देवस्मिता था जो बहुत ही सुशील, सच्चरित्र कन्या थी। साथ ही साथ वो भगवान विष्णु की अनन्य भक्त थी। समय के साथ देवस्मिता के रूप और गुण की चर्चा दूर-दूर तक फ़ैल गयी और फिर धर्मगुप्त ने सही समय आने पर उसका विवाह पास ही ताम्रलिपि नगर के एक धार्मिक युवक मणिभद्र से कर दिया। देवस्मिता पतिव्रता थी। घर का सारा काम -काज संभालने के साथ ही वह पति और सास- ससुर की खूब सेवा करती थी तथा अतिथियों का स्वागत सत्कार पूरी निष्ठा से करती थी जिससे सब लोग उससे प्रसन्न रहते थे। कुछ समय बाद उसके ससुर का देहांत हो गया जिससे सारी गृहस्थी का बोझ मणिभद्र पर आ गया और उसे देवस्मिता को छोड़ व्यापार के लिए विदेश जाना पड़ा।

23 सितंबर 2018

अनंत चतुर्दशी

आप सभी को अनंत चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएँ। ये हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो गणेश चतुर्दशी के दसवें दिन मनाया जाता है। हिन्दू धर्म के अतिरिक्त जैन धर्म में भी इसका विशेष महत्त्व है। प्रतिवर्ष भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के नाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। उनके इस रूप में उनके उस अनंत स्वरुप का वर्णन है जिसे उन्होंने अर्जुन को अपने विराट स्वरुप के रूप में दिखाया था।

21 सितंबर 2018

विजेता - धार्मिक कहानी प्रतियोगिता १ - "सत्कर्म की महिमा"

"उठिए प्राणनाथ इतनी गहरी निद्रा में सोना सृष्टि के पालनकर्ता के लिए उचित नहीं है। देखिए कितने भक्त आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।" शेष शैया पर सोते भगवान विष्णु को चिन्तित लक्ष्मी जी बार-बार जगाने का प्रयत्न कर ही रही थी कि "बहन लक्ष्मी... नारायण... कहाँ है आप लोग?" - ये कहते हुए देवी पार्वती वहाँ उपस्थित हुई।

18 सितंबर 2018

जब युधिष्ठिर की उदारता से दुर्योधन अवाक् रह गया

ये प्रसंग महाभारत के राजसू यज्ञ का है। कृष्ण ने चतुराई से भीम के हांथों जरासंध का वध करवा दिया। एक वही था जो युधिष्ठिर के राजसू यज्ञ के लिए बाधा बन सकता था। उसके बाद पांडवों ने दिग्विजय किया और समस्त आर्यावर्त के राजाओं को अपने ध्वज तले आने को विवश कर दिया। इसके बारे में विस्तार पूर्वक आप यहाँ पढ़ सकते हैं। जब राजसू यज्ञ हुआ तो पुरे आर्यावर्त से समस्त राजा इंद्रप्रस्थ को पधारे। दुर्योधन भी कर्ण, शकुनि एवं दुःशासन सहित वहाँ पहुँचा। अब तक उसने समझा था कि बटवारे में निर्जन खाण्डवप्रदेश पाकर पाण्डव हतोत्साहित हो जाएंगे किन्तु जब उसने वहाँ की चमक-धमक देखा तो हैरान रह गया। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि पांडव इतनी समृद्ध नगरी का निर्माण कर सकते हैं।