20 दिसंबर 2017

पौराणिक काल के योद्धाओं का स्तर

ये शायद मेरा सबसे महत्वकांक्षी लेख है। हम लोगों ने कई बार रामायण, महाभारत एवं अन्य पौराणिक कहानियों में योद्धाओं के ओहदे के बारे में पढ़ा है। सबसे आम शब्द जो इन पुस्तकों में आता है वह है "महारथी" और ये शब्द इतना आम बना  दिया गया है कि किसी भी योध्या के लिए हम महारथी शब्द का प्रयोग कर लेते है जबकि यह एक बहुत बड़ी पदवी होती थी और कुछ चुनिंदा योद्धा हीं महारथी के स्तर तक पहुच पाते थे। क्या आपको पता है कि इन श्रेणिओं को पाने के लिए भी कुछ योग्यता जरुरी होती थी? अगर नहीं तो आज हम पौराणिक काल के योद्धाओं के स्तर के बारे में जानेंगे।

16 अक्तूबर 2017

इरावान

इरावान महाभारत का बहुचर्चित तो नहीं किन्तु एक मुख्य पात्र है। इरावान महारथी अर्जुन का पुत्र था जो एक नाग कन्या उलूपी से उत्पन्न हुआ था। द्रौपदी से विवाह के पूर्व देवर्षि नारद के सलाह के अनुसार पाँचों भाइयों ने अनुबंध किया कि द्रौपदी एक वर्ष तक किसी एक भाई की पत्नी बन कर रहेगी। उस एक वर्ष में अगर कोई भी अन्य भाई भूल कर भी बिना आज्ञा द्रौपदी के कक्ष में प्रवेश करेगा तो उसे १२ वर्ष का वनवास भोगना पड़ेगा। देवर्षि ने ये अनुबंध इस लिए करवाया था ताकि दौपदी को लेकर भाइयों के मध्य किसी प्रकार का मतभेद ना हो।

23 मई 2017

भगवान चित्रगुप्त एवं कायस्थ वंश

कायस्थों का स्त्रोत श्री चित्रगुप्तजी महाराज को माना जाता है। कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने चार वर्णो को बनाया (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र) तब यम जी ने उनसे मानवों का विवरण रखने में सहायता मांगी। फिर ब्रह्माजी ११००० वर्षों के लिये ध्यानसाधना मे लीन हो गये और जब उन्होने आँखे खोली तो देखा कि "आजानुभुज करवाल पुस्तक कर कलम मसिभाजनम" अर्थात एक पुरुष को अपने सामने कलम, दवात, पुस्तक तथा कमर मे तलवार बाँधे पाया।