रविवार, 12 अप्रैल 2015

३३ कोटि देवताओं का रहस्य

हिन्दू धर्म सागर की तरह विशाल है. इसकी विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हिन्दू धर्म में कुल देवी देवताओं की संख्या ३३ करोड़ बताई जाती है. सुनने में कुछ अजीब नहीं लगता? क्या ये संभव है कि किसी धर्म में कुल देवी देवताओं की संख्या ३३ करोड़ हो सकती है? किसी को भी आश्चर्य हो सकता है. कहते हैं कि अधूरा ज्ञान हानिकारक हो सकता है. तो आईये हम इस बारे में कुछ आश्चर्यजनक तत्थ्य जानें.

सबसे पहले ये बात कि हिन्दू धर्म में कुल ३३ करोड़ देवी देवतायें हैं ये सत्य नहीं है. मैंने कई धर्म गुरुओं को पुरे विश्वास के साथ ये कहते सुना है कि ये संख्या सटीक रूप से ३३ करोड़ ही हैं किन्तु जब उनसे ये पूछा जाए कि केवल ३३ देवी देवताओं के नाम बताएं, निश्चित रूप से उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ेगी.

सबसे पहली बात, वेद, पुराण, गीता, रामायण, महाभारत या किसी अन्य धार्मिक ग्रन्थ में ये नहीं लिखा कि हिन्दू धर्म में ३३ करोड़ देवी देवताओं हैं और यही नहीं देवियों को कहीं भी इस गिनती में शामिल नहीं किया है. इतनी विशाल संख्या देखते हुआ शायद उन्हें बाद में इस सूची में शामिल कर लिया गया होगा. हमारे धर्म ग्रंथों में ३३ करोड़ नहीं बल्कि "३३ कोटि" देवताओं (ध्यान दें, देवता न कि भगवान) का जिक्र है. ध्यान दें कि यहाँ "कोटि" शब्द का प्रयोग किया गया है, करोड़ का नहीं. आज हम जिसे करोड़ कहते हैं, पुराने समय में उसे कोटि कहा जाता है. युधिष्ठिर ने ध्यूत सभा में अपने धन का वर्णन करते समय कोटि शब्द का प्रयोग किया है. आधुनिक काल के विद्वानों ने कोटि का अर्थ सीधा सीधा अनुवाद कर करोड़ कर दिया.

दरअसल यहाँ कोटि का प्रयोग ३३ करोड़ नहीं बल्कि ३३ (त्रिदशा) "प्रकार" के देवताओं के लिए किया गया है. कोटि का एक अर्थ "प्रकार" (तरह) भी होता है. उस समय जब देवताओं का वर्गीकरण किया गया तो उसे ३३ प्रकार में विभाजित किया गया जो समय के साथ अपभ्रंश होकर कब "करोड़" के रूप में प्रचलित हो गया पता ही नहीं चला. दुःख कि बात ये है कि आज भी हम हिन्दू रटे रटाये तौर पर बड़े गर्व से कहते हैं कि हमारे देवी देवताओं की संख्या इतनी अधिक है. इन ३३ कोटि (करोड़ नहीं) देवताओं को वर्णन आपको किसी भी धर्म ग्रन्थ खासकर पुराणों में मिल जाएगा.

१२ आदित्य, ८ वसु, ११ रूद्र एवं दो अश्विनी कुमार मिलकर ३३ (१३+८+११+२ = ३३) देवताओं की श्रेणी बनाते हैं. इनका वर्णन नीचे दिया गया है:

१२ आदित्य (सभी देवताओं में मूल देवता)

  1. धाता
  2. मित
  3. आर्यमा 
  4. शक्रा
  5. वरुण
  6. अंश
  7. भाग
  8. विवास्वान
  9. पूष
  10. सविता
  11. त्वास्था
  12. विष्णु
८ वसु (इंद्र और विष्णु के सहायक)
  1. धर (पृथ्वी)
  2. ध्रुव (नक्षत्र)
  3. सोम (चन्द्र)
  4. अह (अंतरिक्ष)
  5. अनिल (वायु)
  6. अनल (अग्नि)
  7. प्रत्युष (सूर्य)
  8. प्रभास (ध्यौ: यही आठवें वसु थे जिनका जन्म भीष्म के रूप में गंगा की आठवी संतान के रूप में हुआ)
११ रूद्र (भगवान शंकर के प्रमुख अनुयायी. इन्हें उनका (भगवान रूद्र) का हीं रूप माना जाता है) 
  1. हर 
  2. बहुरूप
  3. त्रयम्बक
  4. अपराजिता
  5. वृषाकपि
  6. शम्भू
  7. कपार्दी
  8. रेवात
  9. मृगव्याध
  10. शर्वा
  11. कपाली
२ अश्विनी कुमार (इनकी गिनती जुड़वाँ भाइयों के रूप में एक साथ ही होती है जो देवताओं के राजवैध भी हैं)
  1.  नसात्या
  2. दसरा
कुल ३३ कोटि (प्रकार) देवता

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपका ब्लाग काफ़ी अच्छा है । रोचक शीर्षकों के तहत महत्वपूर्ण धार्मिक ऐतहासिक जानकारियों का संकलन है । अपना फ़ेसबुक बैज भी इस ब्लाग पर लगायें । सनातन धर्म के प्रसार हेतु आपको हार्दिक धन्यवाद के साथ शुभकामनायें ।

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    1. धन्यवाद् राजीव जी. फेसबुक के बैज के लिए काम कर रहा हूँ.

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  2. धर्मसागर से मिली रोचक जानकरियो से मै प्रशन्न हू सनातन धर्म के प्रसार हेतु आपको हार्दिक धन्यवाद के साथ शुभकामनायें । धन्यवाद

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    1. Dhanyawad Shubham.. Agar accha laga ho to aur logon ko bhi is site ke bare me batayen.

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  3. Aapki jankari puri nahi hai aagar aap Sahi hai to ek bat ka jawab de devi durga ke 9 Roop hai aur un 9 roopon ke 9 Roop bhi hai (10 Maha vidya dekhe) 33 se jayada abhi ho gaye aap bhagwan ka choodiye mehej manusya ke nirman ki kahani pade 100 se jayada devtaon ka nam aapko pata chal jayega aapna no dijiye aapke is bat ka mai jawab dunga

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    1. सुमित जी, सबसे पहले धर्मसंसार को देखने के लिए धन्यवाद। कृपया आप ये देखें कि ये लेख किस सन्दर्भ में लिखा गया है। यहाँ मेरा तात्पर्य केवल "करोड़" एवं "कोटि" का भेद बताना है। मैंने कहीं भी ये नहीं कहा है कि केवल यही ३३ देवता हैं। आपका कहना सही है कि आपको अनेक देवताओं एवं उपदेवताओं का वर्णन वेदों और पुराणों में मिल जाएगा। मैं इस से भी सहमत हूँ कि जितने देवो का वर्णन हिन्दू धर्म में है उतना किसी और धर्म में नहीं (हालाँकि ग्रीक धर्म में भी सैकड़ों देवता हैं) लेकिन ३३ करोड़ को समझने की कोशिश करें। इसका मतलब ३३००००००० देवताओं से है जो कि व्यहवारिक नहीं लगता। वैसे आपके इस सुझाव के लिए आभारी हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि इस ब्लॉग के अन्य पोस्ट पर भी अपनी राय दें।

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  4. श्रीमान जी, आपने कोटि का वर्णन तो भली भांति कर दिया है, और भी अच्छा होता यदि आप इन कोटियों के अर्थ भी बता देते तो| यानि कि इन कोटियों का शब्दार्थ एवं भावार्थ भी बताते तो यह प्रयास और भी अधिक सार्थक होता|

    कथावाचक ज्ञानी लखविंदर सिंह 'वेदान्ती'

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    1. लखविंदर जी, आदित्य, वसु, रूद्र एवं अश्विनीकुमार की संक्षिप्त अर्थ पोस्ट में ही दिया गया है। अगर आपका कोई और प्रश्न है तो मुझे प्रसन्नता होगी।

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