21 दिसंबर 2011

कालचक्र और युगों का वर्णन

मनुष्य का एक वर्ष देवताओं का १ दिन होता है जिसे दिव्य दिवस कहते हैं। इसी प्रकार मनुष्यों के ३६० वर्ष (यहाँ ३६५ के हिसाब से गणना नहीं होती) देवताओं का १ वर्ष होता है जिसे दिव्य वर्ष कहते हैं। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के नाभि कमल से उत्पन ब्रम्हा की आयु १०० दिव्य वर्ष मानी गयी है। पितामह ब्रम्हा के प्रथम ५० वर्षों को पूर्वार्ध एवं अगले ५० वर्षों को उत्तरार्ध कहते हैं। सतयुग, त्रेता, द्वापर एवं कलियुग को मिलकर एक महायुग कहते हैं। ऐसे १००० महायुगों का ब्रम्हा का एक दिन होता है। इसी प्रकार १००० महायुगों का ब्रम्हा की एक रात्रि होती है। अर्थात परमपिता ब्रम्हा का एक पूरा दिन २००० महायुगों का होता है। प्राचीन काल गणना के विषय में विस्तार से यहाँ पढ़ें।