बुधवार, 19 मई 2010

भगवान राम का वंश

हिंदू धर्म में राम को विष्णु का सातवाँ अवतार माना जाता है। वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे - इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध। राम का जन्म इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था। जैन धर्म के तीर्थंकर निमि भी इसी कुल के थे। मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु से विकुक्षि, निमि और दण्डक पुत्र उत्पन्न हुए। इस तरह से यह वंश परम्परा चलते-चलते हरिश्चन्द्र, रोहित, वृष, बाहु और सगर तक पहुँची। इक्ष्वाकु प्राचीन कौशल देश के राजा थे और इनकी राजधानी अयोध्या थी। रामायण के बालकांड में गुरु वशिष्ठजी द्वारा राम के कुल का वर्णन किया गया है जो इस प्रकार है
  1. ब्रह्माजी से मरीचि हुए.
  2. मरीचि के पुत्र कश्यप हुए.
  3. कश्यप के पुत्र विवस्वान थे.
  4. विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए. वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था.
  5. वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था। इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुल की स्थापना की।
  6. इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए.
  7. कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था.
  8. विकुक्षि के पुत्र बाण हुए.
  9. बाण के पुत्र अनरण्य हुए.
  10. अनरण्य से पृथु हुए.
  11. पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ.
  12. त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए.
  13. धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था.
  14. युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए.
  15. मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ.
  16. सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित.
  17. ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए।
  18. भरत के पुत्र असित हुए.
  19. असित के पुत्र सगर हुए.
  20. सगर के पुत्र का नाम असमंज था.
  21. असमंज के पुत्र अंशुमान हुए.
  22. अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए.
  23. दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए। भगीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतरा था.
  24. भगीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे.
  25. ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए. रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब राम के कुल को रघुकुल भी कहा जाता है।
  26. रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए.
  27. प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे.
  28. शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए.
  29. सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था.
  30. अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए.
  31. शीघ्रग के पुत्र मरु हुए.
  32. मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे.
  33. प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए.
  34. अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था.
  35. नहुष के पुत्र ययाति हुए.
  36. ययाति के पुत्र नाभाग हुए.
  37. नाभाग के पुत्र का नाम अज था.
  38. अज के पुत्र दशरथ हुए.
  39. दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए. इस प्रकार ब्रम्हा की उन्चालिसवी पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ.
आभारी वेबदुनिया

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपका संग्रहणीय लेखन बना हुआ है और हम आपके फॉलोअर!

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  2. श्री मान जी , में एक ब्राहमण कुल का बालक हु , मेरा गोत्र कस्मालू है में यह जानना चाहता हु की इस गोत्र का जन्म कैसे और कब हुआ , यह किस ऋषि से उत्पन्न हुआ , किर्पया मेरा मार्गदर्शन करे

    please send kuldeep.sharma1988@yahoo.com

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  3. कुलदीप जी,

    देखता हूँ अगर आपके गोत्र की कोई जानकारी मिलती है तो आपको सूचित करूँगा. अपने वेबसाइट पर भी उसे पोस्ट कर सकता हूँ. धर्मसंसार पर आने के लिए धन्यवाद. ऐसे हीं अपना योगदान और सुझाव भेजते रहिये. मेरे अन्य वेबसाइट पर भी अपनी राय देंगे तो प्रसन्नता होगी.

    www.itsmycountdown.com | www.nilabh.in

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  4. ये जानकारी तो मुझे पता है और भी कई जगह पढ़ी है पर मैं जानना चाहता हूँ कि श्री राम के आगे के कुल का क्या असितत्व है ? लव कुश की पीढ़ी कहाँ है ? क्या लक्ष्मण जी , भारत जी और शत्रुघ्न जी के कोई पुत्र था ? अगर था तो उनकी पीढी का क्या हुआ ?? कोई सज्जन ये जानकारी दे सकता है ???

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    1. lakki jee lav or kuchh dono ke putron ke vanshaj kshtriya rathor rajput huye kuchh ke kachhvaha huye

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  5. kuldeep ji me ek patel kul ka balak hun meri gotr bhuriya he me janana sahata hun ki ees gotr ka janm kab or kese huaa yeah kis rishi se utapan he marag darsan deejiye

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  6. इसमें आपने ययाति को सूर्यवंशी बताया हे जबकि ययाति चंद्रवंशी थे और राम सूर्यवंशी हे फिर केसे समझ में नहीं आया

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    1. सुरेन्द्र जी,

      सारी सृष्टि की उत्पत्ति परमपिता ब्रम्हा से हुई है। वंश या कुल काफी बाद में आये। उदाहरण के रूप में महाराज इक्षवाकू सुर्यवंश के पहले राजा माने जाते है और उनसे ही इक्षवाकू कुल की शुरुआत हुई जिसमे श्रीराम का जन्म हुआ।

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    2. संसार को ज्ञानी जन स्वप्न बता ते है और स्वप्न मे एक अकेला मनुष्य नींद मे देखता है और स्वप्न मे मनुष्य एक होते हुवे अनेक बनता है और स्वप्न तुटते ही आँखें खुलते ही फिर से वह जीव जीसने शरीर धारण करने की वजह से और शरीर मैं हु कहने से मान ने से शरीर से तादात्म्य स्थिति होने से ईश्वर अंश बताया गया जो भी धरती पर आता है उसे पुरुष लिंग और स्त्री लिंग से गुजर कर ही शरीर धारण करना है। संसार मे आत्म ज्ञान आत्म बल से ही तैर सकते है बाकी ओं को तो दुबनाही है फिर क्या दुबते हुवे मनुष्य तो बिचारे बच ने के लिए जो सहारा मिले उसे अपना ले ते है। संसार को सागर की उपमा ज्ञानी जनोने यु ही नही दी उसके पीछे गहरा अध्ययन हुवा है। The best ideology
      it is philosophy of VEDANTA and reality of all living and non living things

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