19 मई 2010

क्रौंचद्वीप

  • क्रौंचद्वीप का विस्तार कुशद्वीपसे दुना हैं. 
  • क्रोत्र्चद्वीप में महात्मा द्युतिमान के जो पुत्र थे; उनके नामानुसार उनके वर्षोंके नाम रखे. उनके कुशल, मन्दग, उष्ण, पीवर, अन्धकारक, मुनि और दुन्दुभि - ये सात पुत्र थे.
  • वहाँ भी देवता और गन्धवोंसे सेवित अति मनोहर सात वर्षपर्वत है। उनमें पहाला क्रोच्त्र दुसरा वामन, तीसरा अन्धकारका, चौथा घोड़ीके मुखके समान रत्नमय स्वाहिनी पर्वत, पाँचवाँ दिवावृत् छठा पुण्डरेकवान् और सातवाँ महापर्वत दुन्दुभि हैं.
  • वे द्वीप परस्पर एक दुसेरेसे दुणे हैं; और उन्हींकी भाँति उनके पर्वत भी (उत्तरोत्तर द्विगुण) हैं. इन सरम्य वर्षों और पर्वतश्रेष्ठोंमें देवगणोंके सहित सम्पूर्ण प्रजा निर्भय होकर रहती है.
  • वहाँके ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र क्रम से पुष्कर, पुष्कल, धन्य और तिष्य कहलाते है.
  • उस द्वीपमें सात प्रधान तथा अन्य सैकड़ों क्षुद्र नदियाँ है. वे सात वर्षनदियाँ गौरी, कुमुद्वती, सन्ध्या, रात्री, मनोजवा, क्षान्ति और पुण्डरीका है.
  • वहाँ भी रुद्ररूपी जनार्दन भगवान् विष्णुकी पुष्करादि वर्णोंद्वारा यज्ञादिसे पूजा की जाती हैं. 
  • यह क्रोत्र्चद्वीप चारों ओरसे अपने तुल्य परिमाणवाले दधिमण्ड (मट्ठे) के समुद्रसे घिरा हुआ है. और यह मट्ठेका समुद्र भी शाकद्वीप से घिरा हुआ हैं, जो विस्तारमें क्रोत्र्चद्वीपसे दुना है.
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