17 मई 2010

शाल्मलद्वीप

  • शाल्मलद्वीप के स्वामी वीरवर वपुष्मान थे । उनके पुत्र श्वेत, हरित, जीमूत, रोहित, वैद्युत, मानस और सुप्रभ थे । उनके सात वर्ष उन्हींके नामानुसार संज्ञावाले है.
  • यह (प्लक्षद्वीपको घेरनेवाला) इक्षुरस का समुद्र अपनेसे दूने विस्तारवाले इस शाल्मलद्विप से चारों ओरसे घिरा हुआ है. वहाँ भी रत्नोंके उद्भवस्थानरूप सात पर्वत हैं जो उसके सातों वर्षोंके विभाजक हैं तथा सात नदियाँ है.
  • पर्वतोंमें पहला कुमुद, दुसरा उन्नत और तीसरा बलाहक है तथा चौथा द्रोणाचल हैं, जिसमें नाना प्रकारकी महौषधियाँ है. पाँचवाँ कंक, छठा महिष और सातवाँ गिरिवर कुकुद्यान् है। 
  • यहाँ योनि, तोया, वितृष्णा, चन्द्रा, मुक्ता, विमोचनी और निवृत्ति समर्णमात्र से ही सारे पापोंको शान्त कर देनेवाली नदियाँ है.
  • श्वेत, हरित, वैद्युत, मानस जीमूत, रोहित और अति शोभायमान सुप्रभ - ये उसके चारों वर्णोंसे युक्त सात वर्ष है.
  • शाल्मलद्वीपमें कपिल, अरुण, पति और कृष्ण ये चार वर्ण निवास करते हैं जो पृथक्-पृथक् क्रमशः ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के रूप हैं। ये यजनशील लोग सबके आत्मा, अव्यय और यज्ञके आश्रय वायुरूप विष्णुभगवान्‌का श्रेष्ठ यज्ञोंद्वारा यजन करते है. 
  • इस अत्यन्त मनोहर द्वीपमें देवगण सदा विराजमान रहते हैं । इसमें शाल्मल ( सेमल ) का एक महान वृक्ष हैं जो अपने नामसे ही अत्यन्त शान्तिदायक है. 
  • यह द्वीप अपने समान ही विस्तारवाले एक मदिराके समुद्रसे सब ओरसे पूर्णतया घिरा हुआ है और यह सुरासमुद्र शाल्मलद्वीपसे दुने विस्तारवाले कुशद्वीप द्वारा सब ओंरसे परिवेष्टित है.
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