10 फ़रवरी 2010

हिन्दू काल गणना

  • जो कि श्वास (प्राण) से आरम्भ होता है, यथार्थ कहलाता है और जो त्रुटि से आरम्भ होता है अवास्तविक कहलाता है। छः श्वास से एक विनाड़ी बनती है। साठ श्वासों से एक नाड़ी बनती है। 
  • साठ नाड़ियों से एक दिवस (दिन और रात्रि) बनते हैं। तीस दिवसों से एक मास (महीना) बनता है।
  • १२ मास का एक मानव या सौर वर्ष होता है।   
  • इस प्रकार ३६० मानव वर्ष (यहाँ ३६५ दिन के हिसाब से गणना नहीं होती) देवताओं का एक वर्ष होता है जिसे दिव्य वर्ष कहते हैं।
  • इतनी ही आयु दैत्यों की भी होती है बस अंतर ये है कि देवताओं का दिन दैत्यों की रात्रि और देवताओं की रात्रि दैत्यों का दिन होती है। 
देवताओं/दैत्यों की काल गणना
  • १ मानव वर्ष = ३६० मानव दिवस (यहाँ ३६५ दिन के हिसाब से गणना नहीं होती) = १ दिव्य दिवस
  • ३० दिव्य दिवस = १ दिव्य मास = ३० मानव वर्ष = १०८०० मानव दिवस
  • १२ दिव्य मास = १ दिव्य वर्ष = ३६० मानव वर्ष = १२९६०० मानव दिवस
  • देवताओं का जीवन काल = १०० दिव्य वर्ष = ३६००० मानव वर्ष = १२९६०००० मानव दिवस
युगों की गणना
  • २ अयन (छः मास अवधि) = १ मानव वर्ष = एक दिव्य दिवस = ३६० मानव दिवस
  • ४००० + ४०० + ४०० = ४८०० दिव्य वर्ष = १ कॄत युग (सतयुग) = १७२८००० मानव वर्ष
  • ३००० + ३०० + ३०० = ३६०० दिव्य वर्ष = १ त्रेता युग = १२९६००० मानव वर्ष
  • २००० + २०० + २०० = २४०० दिव्य वर्ष = १ द्वापर युग = ८६४००० मानव वर्ष
  • १००० + १०० + १०० = १२०० दिव्य वर्ष = १ कलि युग = ४३२००० मानव वर्ष
  • १२००० दिव्य वर्ष = ४ युग = १ महायुग (दिव्य युग भी कहते हैं) = ४३२०००० मानव वर्ष
ब्रह्मा की काल गणना
  • १००० महायुग = १ कल्प = ब्रह्मा का १ दिवस (केवल दिन) = ४३२००००००० (चार अरब बत्तीस करोड़ मानव वर्ष) और यही सूर्य की खगोलीय वैज्ञानिक आयु भी है। दो कल्प ब्रह्मा के एक दिन और रात बनाते हैं। 
  • २००० महायुग = २ कल्प = ब्रह्मा का पूर्ण दिवस (दिन एवं रात्रि) = ८६४००००००० (आठ अरब चौसठ करोड़) मानव वर्ष। 
  • ३० ब्रह्मा के दिन = १ ब्रह्मा का मास = २५९२०००००००० (२ खरब उनसठ अरब बीस करोड़) मानव वर्ष। 
  • १२ ब्रह्मा के मास = १ ब्रह्मा के वर्ष = ३११०४०००००००० (इकतीस खरब दस अरब चालीस करोड़ मानव वर्ष)।
  • ५० ब्रह्मा के वर्ष = १ परार्ध = १५५५२०००००००००० (पंद्रह नील पचपन खरब बीस अरब) मानव वर्ष। 
  • २ परार्ध = १०० ब्रह्मा के वर्ष = १ महाकल्प (ब्रह्मा का जीवन काल) = ३११०४०००००००००० (इकतीस नील दस खरब चालीस अरब) मानव वर्ष।
  • ब्रह्मा का एक दिवस १० भागों में बंटा होता है, जिसे चरण कहते हैं। इसमें से सतयुग में , त्रेतायुग में , द्वापर युग में एवं कलियुग में चरण होते है। यह चक्र ऐसे दोहराता रहता है कि ब्रह्मा के एक दिवस में १००० महायुग हो जाते हैं।  
  • १ महायुग में १४ मनु शासन करते हैं। अर्थात एक मनु ७१ महायुगों तक शासन करता है जिसे मवंतर कहते हैं।
  • एक मवंतर अर्थात प्रत्येक मनु के शासनकाल के बाद महाप्रलय आता है और पृथ्वी जलमग्न हो जाती है।
  • हम वर्तमान में वर्तमान ब्रह्मा के ५१ वें वर्ष में, सातवें (वैवस्वत) मनु के शासन में, श्वेतवाराह कल्प के द्वितीय परार्ध में, अठ्ठाईसवें कलियुग के प्रथम वर्ष के प्रथम दिवस में विक्रम संवत २०६४ में हैं। इस प्रकार अब तक १५ नील, ५५ खरब, २१ अरब, ९७ करोड़, १९ लाख, ६१ हज़ार, ६२० वर्ष इस ब्रह्मा को सॄजित हुए हो गये हैं। 
समय की इकाई
  • एक परमाणु मानवीय चक्षु के पलक झपकने का समय = लगभग ४ सैकिण्ड। 
  • एक विघटि = ६ परमाणु = (विघटि) २४ सैकिण्ड। 
  • एक घटि या घड़ी = ६० विघटि = २४ मिनट। 
  • एक मुहूर्त = २ घड़ियां = ४८ मिनट। 
  • एक नक्षत्र अहोरात्रम या नाक्षत्रीय दिवस = ३० मुहूर्त (दिवस का आरम्भ सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक)।
विष्णु पुराण में दिया गया अक अन्य वैकल्पिक पद्धति समय मापन पद्धति अनुभाग, विष्णु पुराण, भाग-१, अध्याय तॄतीय निम्न है
  • १० पलक झपकने का समय = १ काष्ठा
  • ३५ काष्ठा= १ कला
  • २० कला= १ मुहूर्त
  • १० मुहूर्त= १ दिवस (24 घंटे)
  • ५० दिवस= १ मास
  • ६ मास= १ अयन
  • २ अयन= १ वर्ष, = १ दिव्य दिवस
छोटी वैदिक समय इकाइयाँ
  • एक तॄसरेणु = ६ ब्रह्माण्डीय अणु
  • एक त्रुटि = ३ तॄसरेणु, या सैकिण्ड का १/१६८७.५ भाग
  • एक वेध = १०० त्रुटि
  • एक लावा = ३ वेध
  • एक निमेष = ३ लावा, या पलक झपकना
  • एक क्षण = ३ निमेष
  • एक काष्ठा = ५ क्षण = ८ सैकिण्ड
  • एक लघु = १५ काष्ठा, = २ मिनट
  • १५ लघु = एक नाड़ी, जिसे दण्ड भी कहते हैं। इसका मान उस समय के बराबर होता है, जिसमें कि छः पल भार के (चौदह आउन्स) के ताम्र पात्र से जल पूर्ण रूप से निकल जाये, जबकि उस पात्र में चार मासे की चार अंगुल लम्बी सूईं से छिद्र किया गया हो। ऐसा पात्र समय आकलन हेतु बनाया जाता है। 
  • २ दण्ड = एक मुहूर्त
  • ६ या ७ मुहूर्त = एक याम, या एक चौथाई दिन या रत्रि।
  • ४ याम या प्रहर = एक दिन या रात्रि।
चन्द्र मापन
  • एक तिथि वह समय होता है, जिसमें सूर्य और चंद्र के बीच का देशांतरीय कोण बारह अंश बढ़ जाता है। तुथियां दिन में किसी भी समय आरम्भ हो सकती हैं, और इनकी अवधि उन्नीस से छब्बीस घंटे तक हो सकती है। 
  • एक पक्ष या पखवाड़ा = पंद्रह तिथियां
  • एक मास = २ पक्ष ( पूर्णिमा से अमावस्या तक कॄष्ण पक्ष; और अमावस्या से पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष)।
  • एक ॠतु = २ मास
  • एक अयन = ३ ॠतुएं
  • एक वर्ष = २ अयन
ऊष्ण कटिबन्धीय मापन
  • एक याम = ७½ घटि
  • ८ याम अर्ध दिवस = दिन या रात्रि
  • एक अहोरात्र = नाक्षत्रीय दिवस (जो कि सूर्योदय से आरम्भ होता है)
पितरों की समय गणना
  • १५ मानव दिवस = एक पितॄ दिवस
  • ३० पितॄ दिवस = १ पितॄ मास
  • १२ पितॄ मास = १ पितॄ वर्ष
  • पितॄ जीवन काल = १०० पितृ वर्ष= १२०० पितृ मास = ३६००० पितृ दिवस = १८००० मानव मास = १५०० मानव वर्ष। 
पाल्या: एक पाल्य समय की इकाई है, यह बराबर होती है, भेड़ की ऊन का एक योजन ऊंचा घन बनाने में लगा समय, यदि प्रत्येक सूत्र एक शताब्दी में चढ़ाया गया हो। इसकी दूसरी परिभाषा अनुसार, एक छोटी चिड़िया द्वारा किसी एक वर्ग मील के सूक्ष्म रेशों से भरे कुंए को रिक्त करने में लगा समय, यदि वह प्रत्येक रेशे को प्रति सौ वर्ष में उठाती है। यह इकाई भगवान आदिनाथ के अवतरण के समय की है। यथार्थ में यह १०००००००००००००० पल्या पहले था।

कालचक्र के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ। 

7 टिप्‍पणियां:

  1. नीलाभ , तुमने बहुत ही अच्छी जानकारीयाँ उपलब्ध कराई है. बहुत अच्छी शोध की है. तुम धन्यवाद और बधाई के पात्र हो. बेहद सराहनीय प्रयास है जो कि सफल रहा है. हमारी संस्कृति विश्व कि सबसे प्राचीनतम और समृद्धशाली है.

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  3. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


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  4. संपूर्ण विश्व में अंग्रेजी संस्कृति प्रचलित हो जाने से हम अपनी शास्त्र सम्मत दैनिक जीवन में उपयोगी बातें भी भूल चुके हैं ।आपने समय को मापने की पुरानी भारतीय पद्धति पर खोज पूर्ण तथ्य प्रस्तुत किये हैं जो स्वागत योग्य हैं लेकिन इन मूल्यों को भारतीय जीवन में व्यवहार में लाना आप भी जानते हैं कि बहुत ही मुश्किल काम है। हां जानकारी हासिल करने में कोइ बुराई नहीं है।

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