30 अगस्त 2010

दशावतार

हिन्दू धर्म में अवतारों की बड़ी महत्ता है। वैसे तो कई देवताओं ने अवतार लिए किन्तु भगवान विष्णु के अवतार का महत्त्व सबसे अधिक माना जाता है। भगवान शिव के भी कई अवतार हैं किन्तु उनके लिए ज्योतिर्लिंगों को अवतार पर प्रधानता दी जाती है। भगवान विष्णु के दस अवतारों में पहले चार अर्थात मत्स्य, कूर्म, वराह एवं नृसिंह (अमानवीय) सतयुग में, अगले तीन अर्थात वामन, परशुराम एवं श्रीराम (मानवीय) त्रेतायुग में, श्रीकृष्ण द्वापर में तथा बुद्ध एवं कल्कि का अवतरण कलियुग में माना जाता है। यहाँ पर एक विरोध भी है। वैष्णव समाज बुध्द को विष्णु का नवां अवतार मानता है किन्तु कई ग्रन्थ बलराम को विष्णु का आठवाँ और कृष्ण को विष्णु का नवां अवतार मानते हैं। इस तथ्य के अनुसार बलराम और कृष्ण का अवतार द्वापर में माना जाता है।

मत्स्य अवतार (सतयुग): मत्स्य (मछ्ली) के अवतार में भगवान विष्णु ने एक ऋषि को सब प्रकार के जीव-जन्तु एकत्रित करने के लिये कहा और पृथ्वी जब जल में डूब रही थी, तब मत्स्य अवतार में भगवान ने उस ऋषि की नांव की रक्षा की थी। पुराणों एवं मनुस्मृति में ऋषि के स्थान पर ब्रम्हा के पुत्र मनु का वर्णन आता है। इसके पश्चात ब्रह्मा ने पुनः जीवन का निर्माण किया। एक दूसरी मन्यता के अनुसार एक राक्षस ने जब वेदों को चुरा कर सागर में छुपा दिया, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को प्राप्त किया और उन्हें पुनः स्थापित किया।

19 मई 2010

भगवान राम का वंश

हिंदू धर्म में राम को विष्णु का सातवाँ अवतार माना जाता है। वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे - इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध। राम का जन्म इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था। जैन धर्म के तीर्थंकर निमि भी इसी कुल के थे। मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु से विकुक्षि, निमि और दण्डक पुत्र उत्पन्न हुए। इस तरह से यह वंश परम्परा चलते-चलते हरिश्चन्द्र, रोहित, वृष, बाहु और सगर तक पहुँची। इक्ष्वाकु प्राचीन कौशल देश के राजा थे और इनकी राजधानी अयोध्या थी। रामायण के बालकांड में गुरु वशिष्ठजी द्वारा राम के कुल का वर्णन किया गया है जो इस प्रकार है:

6 अप्रैल 2010

राम-शंकर युद्ध

बात उन दिनों कि है जब श्रीराम का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा था। श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न के नेतृत्व में असंख्य वीरों की सेना सारे प्रदेश को विजित करती जा रही थी जहाँ भी यज्ञ का अश्व जा रहा था। इस क्रम में कई राजाओं के द्वारा यज्ञ का घोड़ा पकड़ा गया लेकिन अयोध्या की सेना के आगे उन्हें झुकना पड़ा। शत्रुघ्न के आलावा सेना में हनुमान, सुग्रीव और भारत पुत्र पुष्कल सहित कई महारथी उपस्थित थे जिन्हें जीतना देवताओं के लिए भी संभव नहीं था।

10 फ़रवरी 2010

हिन्दू काल गणना

  • जो कि श्वास (प्राण) से आरम्भ होता है, यथार्थ कहलाता है और जो त्रुटि से आरम्भ होता है अवास्तविक कहलाता है। छः श्वास से एक विनाड़ी बनती है। साठ श्वासों से एक नाड़ी बनती है। 
  • साठ नाड़ियों से एक दिवस (दिन और रात्रि) बनते हैं। तीस दिवसों से एक मास (महीना) बनता है।
  • १२ मास का एक मानव या सौर वर्ष होता है।   
  • इस प्रकार ३६० मानव वर्ष (यहाँ ३६५ दिन के हिसाब से गणना नहीं होती) देवताओं का एक वर्ष होता है जिसे दिव्य वर्ष कहते हैं।
  • इतनी ही आयु दैत्यों की भी होती है बस अंतर ये है कि देवताओं का दिन दैत्यों की रात्रि और देवताओं की रात्रि दैत्यों का दिन होती है।